साइकोलॉजी : लोग क्यों फेक न्यूज़ शेयर करते हैं

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जब भी हम इंटरनेट पर कोई अच्छा आर्टिकल पढ़ेते हैं , उसे शेयर करते हैं क्यूंकि जिस विषय पर आर्टिकल लिखा गया है वह हमें पसंद हैं या फिर उस विषय के हम जानकर है । कभी कभी हमारी कोशिश लोगों के मानसिकता में बदलाव लाने की भी हो सकती हैं। या फिर क्यूंकि उसे शेयर करके मजा आता है या फिर हम प्रेरित होते हैं इसीलिए हम शेयर करते हैं। लेकिन फेक न्यूज़ क्यों शेयर किये जाते हैं जबकि इससे किसी का भलाई तो नहीं होने वाला, इसके पीछे लोगों के साइकोलॉजी के बारे में आगे विस्तार से जानेंगे।

साइकोलॉजी : लोग क्यों फेक न्यूज़ शेयर करते हैं
साइकोलॉजी : लोग क्यों फेक न्यूज़ शेयर करते हैं

एक स्टडी के दौरान फेक न्यूज़ शेयर करने के लिए लोग क्यों प्रेरित होते हैं इसकी जाँच की गयी, जो की जर्नल साइकोलॉजिकल साइंस (Psychological Science ) में प्रकाशित हुई है। इस जर्नल के लेखक अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथर्न कैलिफ़ोर्निया (University of Southern California) के डेनियल एफ्रोन और मेध राज हैं। वे बताते है कि जब भी कोई फेक न्यूज़ वायरल होती है , लोगों के बीच यह बहुत बार आती है। ऐसा भी पहले रिसर्च में देखा गया है की अगर लोग फेक न्यूज़ को पहले भी देख चुके हैं तो उसे सही मानाने की संभावना अधिक है। फिर बहुत बार देख लेने के बाद लोग फेक न्यूज़ को फैलाना अनैतिक नहीं समझते।

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जितना ज्यादा बार लोग फेक न्यूज़ देखते हैं उसे उतना ही सच मानते हैं

रिसर्चर्स ने 150 व्यस्क अमेरिकन्स से पूछताछ की थी।उनको फेक न्यूज़ लिखना या उसे लाइक और शेयर करना नैतिक रूप से कितना सही या गलत है बताना था। उन्होंने पाया की प्रतिभागी लोग ऐसे फेक न्यूज़ को शेयर करना कम अनैतिक मानते हैं जिसको उन्होंने एक से ज्यादा बार देखा है। इतना ही नहीं बल्कि उसके लाइक या शेयर करने की भी ज्यादा संभावना है। हालाँकि अगर वे फेक न्यूज़ को पहली बार देख रहे तो उसे सच नहीं मानते।

एक और स्टडी में उन्होंने देखा की अगर प्रतिभागियों को एक बार न्यूज़ दिखने के जगह उसे चार बार दिखया जाये तो सोशल मीडिया पर शेयर करने की शंभावना ज्यादा है। ऐसे में वह ये भी नहीं सोचता कि न्यूज़ फेक है या नहीं।

रिसर्चर्स मानते हैं कि फेक न्यूज़ जितना बार लोगों के द्वारा देखा जायेगा , उतना ही बार इसे शेयर किया जायेगा और फिर लोग इसे सच मानेंगे। इस स्टडी से पता चलता है कि गलत जानकारी अगर बार बार दोहराया जाये तो इसकी नैतिक निंदा नहीं होती। लेखक ने कहा कि गलत जानकारी लोगों में फूट पैदा कर सकती है और यह गणतंत्र के लिए खतरा भी है। इसीलिए यह जानना जरुरी है फेक न्यूज़ कब और कैसे फैलता है।

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पहले गूगल करें तभी न्यूज़ फॉरवर्ड करें

व्यक्तिगत रूप से यह हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि सोशल मीडिया पर कोई भी न्यूज़ फॉरवर्ड करते वक़्त उसकी सत्यता के बारे में चेक कर लें।

भारत में फैले कुछ फेक न्यूज़

  1. 2018 में केरल में जब बाढ़ आयी थी तब सोशल मीडिया पर दुबई द्वारा भारी मात्रा रिलीफ फण्ड देने की गलत जानकारी फ़ैल गयी थी।
  2. टाटा केमिकल्स के बारे में भी फेक न्यूज़ फैली थी की टाटा नमक में भारी मात्रा में पोटैशियम फेर्रोसाइनाइड (Potassium Ferrocynide) होते हैं।
  3. सोशल मीडिया पर टीकाकरण से खतरा के बारे अफवाह फैली थी जिसके कारण मुंबई के स्कूलों में टीकाकरण रोकना पड गया था।
  4. नेथरलैंड्स में 5G टेस्टिंग के दौरान बहुत से पक्षियों के मरने की फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

यह भी पढ़ें : क्या आप लोगों से अपने बारे में ज्यादा शेयर करके पछताते हैं

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