हजारों जापानी लोग जैन धर्म धारण करने के लिए आ रहे है भारत

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हजारों जापानी लोग जैन विचारधारा से प्रभावित होकर जैन धर्म धारण करने के लिए भारत की ओर रुख कर रहे हैं।

सफेद कपड़े में लिपटे हुए वे मंत्र का जाप करते हैं। सूर्योदय के साथ जागते हैं, और केवल गर्म पानी का सेवन करते हैं। जैन मंदिरों में घंटों ध्यान करते हैं और सूर्यास्त से पहले भोजन करते हैं। इसके अलावा वे प्रति वर्ष तीर्थ यात्रा करने के लिए भारत भी आते हैं जहां पर वे भिक्षुओं से ज्ञान ग्रहण करते हैं और जैन लिपि का अध्ययन करते हुए सप्ताह बिताते हैं।

जैन धर्म (Jain Dharma)अपनाने हज़ारों जापानी लोग भारत आ रहे
जैन धर्म (Jain Dharma)अपनाने हज़ारों जापानी लोग भारत आ रहे

हर साल जैन धर्म अपनाने के लिए सैकड़ों जापानी लोग पालीताना और शंखेश्वर की तरफ यात्रा करते हैं। चुरुशी मियाजावा एक यात्री की तरह 2005 में भारत आए थे, लेकिन स्वर्गीय जयंत सेन सुरेश्वर जी महाराज साहेब के साथ पहली मुलाकात के बाद उन्होंने इस पथ में शामिल होने का निर्णय ले लिया। उन्होंने सब सुख सुविधाओं को छोड़कर एक जैन भिक्षु की तरह  न्यूनतर जीवन जीने का संकल्प लिया।

इसके बाद चुरुशी से ने दीक्षा लिया। वे कहते हैं कि उनके गुरु ने उनको एक बड़ा काम सौंपा है, पूरे जापान में जैन धर्म का प्रसार करना। तब से हर महीने सैकड़ों जापानी लोगों , जो भी इस पथ पर चलने के इच्छुक हैं, साथ साल में चार पांच बार भारत की यात्रा करते हैं ।

नगानोकेन के बाद, ओसाका और टोक्यो में जैन धर्म की लोकप्रियता है बढ़ती जा रही है।

भारत के बाहर कनाडा , यूरोप , केनिया , यूनाइटेड किंगडम तथा फिजी जैसे देशों में भी इसके मानने वाले बहु संख्या में मौजूद है।

 Source |Featured Image

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